रंग यात्रा
• थियेटर ऑफ रेलेवंस के नाटक 'द... अदर वर्ल्ड' से दुनिया को दिया पारिस्थितिकी बचाने का संदेश महाराष्ट्र के पांच बच्चों ने बजाया विदेशी सरजमीं पर डंका
दैनिक भास्कर
मुंबई, मंगलवार, 26 नवंबर 2024
भास्कर न्यूज | मुंबई. थियेटर ऑफ रेलेवंस के नाटक 'द... अदर वर्ल्ड' के पारिस्थितिकी और मानविकी संदेश से 72 दिन तक यूरोप गुंजायमान रहा। महाराष्ट्र के पांच बच्चों ने मंजुल भारद्वाज के निर्देशन में 14 सितंबर से 24 नवंबर तक विदेशी सरजमीं पर भारतीय रंगमंच का डंका बजाया। इन बच्चों ने पहले कभी अभिनय नहीं किया था। मंजुल ने इन्हें महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाके में प्रशिक्षित किया। मंजुल का कहना है, 'अमूमन भारतीय रंगमंच पर पाश्चात्य धुंध छाई रहती हैं। लेकिन थियेटर ऑफ रेलेवंस के रंग दर्शन ने सर्द यूरोप की बर्फ को भारतीय दर्शन, तत्व और कलात्मक ताप से पिघला दिया।' जर्मनी के शहर हैम्बर्ग स्थित ब्यूरो फॉर कुल्तुर एंड मीडिया प्रोजेक्ट द्वारा आयोजित किंडर कुल्तुर कारवां के 25वें उत्सव में थियेटर ऑफ रेलेवंस ने नाटक 'द... अदर वर्ल्ड' की कोलोन, बोखम, आखन, आरेंसबर्ग, स्विरीन, डॉर्स्टन, रदोलफ्जेल और लीवरकुसन में 10 प्रस्तुतियां की। इन्हें पांच हजार से ज्यादा प्रौढ़ों, बच्चों और युवाओं ने देखा। साथ ही 15 कार्यशालाएं कीं। इनमें 300 से ज्यादा सहभागियों ने हिस्सा लिया।
प्राकृतिक प्रकोप से बचाने का कलात्मक
अभियान: नाटक द... अदर वर्ल्ड' झुलसी पृथ्वी और तफ्ते ब्रह्मांड को शांत कर प्राकृतिक प्रकोप से मानवता को बचाने का कलात्मक अभियान है। यह पर्यावरण और पारिस्थितिकी को सहेजने की कलात्मक प्रतिज्ञा है। रंग चिंतक मंजुल भारद्वाज के लेखन निर्देशन में थियेटर ऑफ रेलेवस की अभ्यासक अश्विनी नांदेडकर, सायली पावस्कर और कोमल खामकर के मार्गदर्शन में इसे यूरोप में साकार किया महाराष्ट्र के पांच बच्चों तनिष्का लोंढे, नेत्रा देवाडिगा, प्रांजल गायकवाड़, राधिका गाड़ेकर और संजर शिंदे ने।
क्या है किंडर कुल्तुर कारवां किंडर कुल्तुर कारवां एक सांस्कृतिक कारवां
है। यह 25 वर्ष से अंतर महाद्वीपीय युवाओं को सांस्कृतिक आदान-प्रदान का अवसर दे रहा है। इसमें दुनिया के विभिन्न महाद्वीपों के सांस्कृतिक समूहों की भागीदारी एक वैश्विक समझ पैदा करती है। इस बार कारखां में दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका और एशिया के सांस्कृतिक समूहों ने हिस्सा लिया। हैम्बर्ग में कारवां के 25वें सालाना जलसे में निमंत्रित समूहों ने अपनी संस्कृति के रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। लोक नृत्यों की विशेष प्रस्तुति से दर्शाई भारतीय विविधता ने दर्शकों का मन मोह लिया।
यात्रा ने मुझे दो बहुमूल्य सिद्धांत दिए हैं- सत्य और शक्ति। मैं इन, अनुभवों को एक बॉक्स में बंद करके नहीं, बल्कि अपने साथ जीवित रखूंगी। तनिष्का लोंढे
यूरोप में हमारा का हर प्रदर्शन ऊर्जावान, हाउसफुल, रचनात्मक और रंग-बिरंगा था। हर शो में नए लोगों से मिलना बहुत रोमांचक था। राधिका गाड़ेकर
दुनिया में बदलाव लाने के उद्देश्य से मैंने यूरोप के लिए उड़ान भरी। 'द... अदर वर्ल्ड' नाटक से भारत का प्रतिनिधित्व करने में गर्व महसूस हुआ। नेत्रा देवाडिगा
पारिस्थितिकी को बचाने के लक्ष्य के साथ भारत का प्रतिनिधित्व करना सबसे बड़ी उपलब्धि है। यूरोप के अनुभव ने मुझे एक नया मार्ग दिया है। संजर शिंदे
72 दिनों में किसी की बेटी और छात्रा के रूप में नहीं, बल्कि प्रांजल के रूप में जीवन जिया है, खुद को जाना है। इससे जीवन की दिशा मिली है। प्रांजल गायकवाड़

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