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Wednesday, November 27, 2024

महाराष्ट्र के पांच बच्चों ने यूरोप में बजाया भारतीय रंगमंच का डंका थियेटर ऑफ रेलेवंस के नाटक 'द... अदर वर्ल्ड' ने पारिस्थिति की बचाने का दिया संदेश

महाराष्ट्र के पांच बच्चों ने यूरोप में बजाया भारतीय रंगमंच का डंका थियेटर ऑफ रेलेवंस के नाटक 'द... अदर वर्ल्ड' ने पारिस्थिति की बचाने का दिया संदेश

- सायली पावसकर


अभियान आज तक

इंदौर, 28 नवंबर 2024


मुंबई । महाराष्ट्र के पांच बच्चों ने यूरोप में थियेटर ऑफ रेलेवंस के नाटक 'द... अदर वर्ल्ड के माध्यम से पारिस्थितिकी बचाने का संदेश दिया। इस नाटक ने यूरोप के विभित्र शहरों में 10 प्रस्तुतियां दीं और 15 कार्यशालाएं आयोजित कीं।

इस नाटक के माध्यम से बच्चों ने पारिस्थितिकी को बचाने के महत्व को उजागर किया और लोगों को जागरूक किया। यह नाटक झुलसी पृथ्वी और तपते ब्रह्मांड को शांत करने का एक कलात्मक अभियान है।



किंडर कुल्तुर कारवां के 25वें उत्सव में थियेटर ऑफ रेलेवंस के

नाटक 'द... अदर वर्ल्ड' की 10 प्रस्तुतियां की गईं। इन प्रस्तुतियों में 5,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया।

इस नाटक के निर्देशक मंजुल भारद्वाज ने कहा, "अमूमन भारतीय रंगमंच पर पाश्चात्य धुंध छाई रहती हैं, लेकिन थियेटर ऑफ रेलेवंस के रंग दर्शन ने सर्द यूरोप की बर्फ को भारतीय दर्शन, तत्व और कलात्मक ताप से पिघला दिया। महाराष्ठ के पांच बच्चों तनिष्का लोंढे, नेत्रा देवाडिगा, प्रांजल गायकवाड़, राधिका गाडेकर और संजर शिंदे ने इस नाटक में अभिनय किया। इन बच्चों ने यूरोप में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और भारतीय रंगमंच का डंका बजाया।


Monday, November 25, 2024

रंग यात्रा • थियेटर ऑफ रेलेवंस के नाटक 'द... अदर वर्ल्ड' से दुनिया को दिया पारिस्थितिकी बचाने का संदेश महाराष्ट्र के पांच बच्चों ने बजाया विदेशी सरजमीं पर डंका

 रंग यात्रा

• थियेटर ऑफ रेलेवंस के नाटक 'द... अदर वर्ल्ड' से दुनिया को दिया पारिस्थितिकी बचाने का संदेश महाराष्ट्र के पांच बच्चों ने बजाया विदेशी सरजमीं पर डंका


दैनिक भास्कर

मुंबई, मंगलवार, 26 नवंबर 2024


भास्कर न्यूज | मुंबई. थियेटर ऑफ रेलेवंस के नाटक 'द... अदर वर्ल्ड' के पारिस्थितिकी और मानविकी संदेश से 72 दिन तक यूरोप गुंजायमान रहा। महाराष्ट्र के पांच बच्चों ने मंजुल भारद्वाज के निर्देशन में 14 सितंबर से 24 नवंबर तक विदेशी सरजमीं पर भारतीय रंगमंच का डंका बजाया। इन बच्चों ने पहले कभी अभिनय नहीं किया था। मंजुल ने इन्हें महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाके में प्रशिक्षित किया। मंजुल का कहना है, 'अमूमन भारतीय रंगमंच पर पाश्चात्य धुंध छाई रहती हैं। लेकिन थियेटर ऑफ रेलेवंस के रंग दर्शन ने सर्द यूरोप की बर्फ को भारतीय दर्शन, तत्व और कलात्मक ताप से पिघला दिया।' जर्मनी के शहर हैम्बर्ग स्थित ब्यूरो फॉर कुल्तुर एंड मीडिया प्रोजेक्ट द्वारा आयोजित किंडर कुल्तुर कारवां के 25वें उत्सव में थियेटर ऑफ रेलेवंस ने नाटक 'द... अदर वर्ल्ड' की कोलोन, बोखम, आखन, आरेंसबर्ग, स्विरीन, डॉर्स्टन, रदोलफ्जेल और लीवरकुसन में 10 प्रस्तुतियां की। इन्हें पांच हजार से ज्यादा प्रौढ़ों, बच्चों और युवाओं ने देखा। साथ ही 15 कार्यशालाएं कीं। इनमें 300 से ज्यादा सहभागियों ने हिस्सा लिया।

प्राकृतिक प्रकोप से बचाने का कलात्मक

अभियान: नाटक द... अदर वर्ल्ड' झुलसी पृथ्वी और तफ्ते ब्रह्मांड को शांत कर प्राकृतिक प्रकोप से मानवता को बचाने का कलात्मक अभियान है। यह पर्यावरण और पारिस्थितिकी को सहेजने की कलात्मक प्रतिज्ञा है। रंग चिंतक मंजुल भारद्वाज के लेखन निर्देशन में थियेटर ऑफ रेलेवस की अभ्यासक अश्विनी नांदेडकर, सायली पावस्कर और कोमल खामकर के मार्गदर्शन में इसे यूरोप में साकार किया महाराष्ट्र के पांच बच्चों तनिष्का लोंढे, नेत्रा देवाडिगा, प्रांजल गायकवाड़, राधिका गाड़ेकर और संजर शिंदे ने।

क्या है किंडर कुल्तुर कारवां किंडर कुल्तुर कारवां एक सांस्कृतिक कारवां




है। यह 25 वर्ष से अंतर महाद्वीपीय युवाओं को सांस्कृतिक आदान-प्रदान का अवसर दे रहा है। इसमें दुनिया के विभिन्न महाद्वीपों के सांस्कृतिक समूहों की भागीदारी एक वैश्विक समझ पैदा करती है। इस बार कारखां में दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका और एशिया के सांस्कृतिक समूहों ने हिस्सा लिया। हैम्बर्ग में कारवां के 25वें सालाना जलसे में निमंत्रित समूहों ने अपनी संस्कृति के रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। लोक नृत्यों की विशेष प्रस्तुति से दर्शाई भारतीय विविधता ने दर्शकों का मन मोह लिया।

यात्रा ने मुझे दो बहुमूल्य सिद्धांत दिए हैं- सत्य और शक्ति। मैं इन, अनुभवों को एक बॉक्स में बंद करके नहीं, बल्कि अपने साथ जीवित रखूंगी। तनिष्का लोंढे

यूरोप में हमारा का हर प्रदर्शन ऊर्जावान, हाउसफुल, रचनात्मक और रंग-बिरंगा था। हर शो में नए लोगों से मिलना बहुत रोमांचक था। राधिका गाड़ेकर

दुनिया में बदलाव लाने के उद्देश्य से मैंने यूरोप के लिए उड़ान भरी। 'द... अदर वर्ल्ड' नाटक से भारत का प्रतिनिधित्व करने में गर्व महसूस हुआ। नेत्रा देवाडिगा

पारिस्थितिकी को बचाने के लक्ष्य के साथ भारत का प्रतिनिधित्व करना सबसे बड़ी उपलब्धि है। यूरोप के अनुभव ने मुझे एक नया मार्ग दिया है। संजर शिंदे

72 दिनों में किसी की बेटी और छात्रा के रूप में नहीं, बल्कि प्रांजल के रूप में जीवन जिया है, खुद को जाना है। इससे जीवन की दिशा मिली है। प्रांजल गायकवाड़

Wednesday, September 25, 2024

'द..अदर वर्ल्ड' नाटकाला युरोपमध्ये हाऊसफुल्ल प्रतिसाद राज्यातील कलाकारांचा विदेशात नाटकाद्वारे पृथ्वी, हवामान वाचवण्याचा संदेश

 २६ सप्टेंबर २०२४

पुढारी

'द..अदर वर्ल्ड' नाटकाला युरोपमध्ये हाऊसफुल्ल प्रतिसाद
राज्यातील कलाकारांचा विदेशात नाटकाद्वारे पृथ्वी, हवामान वाचवण्याचा संदेश

मुंबई : पुढारी वृत्तसेवा पर्यावरणविषयक जनजागृती

आणि विकासाच्या नावाखाली पर्यावरणाचा ऱ्हास वाचविण्याचे आवाहन करण्यासाठी राज्यातील थिएटर ऑफ रेलेव्हन्स हा नाट्य चळवळीतील समूह सध्या युरोपच्या दौऱ्यावर आहे. पर्यावरण, पृथ्वी आणि हवामान वाचण्यासाठी थिएटर ऑफ रिलेव्हन्स या नाट्य समुहाची निर्मिती असलेले 'द.. अदर वर्ल्ड' हे इंग्रजी नाटक सध्या युरोपमध्ये प्रस्तुत केले जात आहे.

नाशिक, डोंबिवली नवी मुंबई परिसरातील बाल कलाकारांचा समावेश या नाटकात आहे. जर्मनीच्या किंडर कल्चर करावेन (Kinder Kultur Karawane) तर्फे आयोजित या बालसंस्कृती महोत्सवात हे नाटक सादर केले जाणार आहे. यासाठी हा नाट्यसमूह ७२ दिवसांच्या युरोप दौऱ्यावर गेला असून तेथे या नाटकाचे प्रयोग हाऊसफुल्ल होत आहेत.



'द.. अदर वर्ल्ड' हे त्यांचे नाटक जर्मनी आणि युरोपमधील कोलोन, हॅम्बर्ग, रोडेफ्जल, वॉफेन, रोडेस्तान, आचेन, लेव्हरकुसेन आदी विविध शहरांमध्ये प्रस्तूत केले जात आहे. या नाटकाचे काही प्रयोग झाले असून त्यांना उत्तम प्रतिसाद मिळत आहे.


मंजुल भारद्वाज यांनी लिहिलेले आणि दिग्दर्शित केलेले हे नाटक नेत्रा देवाडिगा, प्रांजल गायकवाड, राधिका गाडेकर, तनिष्का लोंढे आणि संजर शिंदे हे बालकलाकार सादर करीत आहेत. सुप्रसिद्ध अभिनेत्री व थिएटर ऑफ रेलेव्हन्स नाट्य सिद्धांतच्या अभ्यासक अश्विनी नांदेडकर, सायली पावसकर आणि कोमल खामकर यांच्या मार्गदर्शनासह, या कलाकारांनी जंगलामध्ये आदिवासींसोबत राहून कमीत कमी, ऊर्जा आणि संसाधनांमध्ये जगून हे नाटक तयार केले आहे!


नाशिक, डोंबिवली, पनवेलच्या मुली

प्रांजल गायकवाड ही नाशिकमध्ये राहत असून दहावीत शिकत आहे. राधिका गाडेकर पिंपळगाव (नाशिक) येथील रहिवासी असून नववीत शिकत आहे. नेत्रा देवाडिगा डोंबिवलीतील असून आठवीत शिकत आहे. तनिष्का लोंढे पनवेल येथे राहत असून १०वीत शिकत आहे. संजर शिंदे चंद्रपूरचा रहिवासी आहे.


Friday, January 12, 2024

Romance with Truth : Theatre of Relevance

 Lokmat Times , Nashik !

Romance with Truth : Theatre of Relevance

"I have performed in over 25 plays till now and have not just remained an actor but have branched out as a writer. This move brought about a huge transformation within myself. Theatre of Relevance taught me to look at life beyond entertainment and with a renewed dimension. It taught me to be intrigued, think, question and rationalise over issues regarding my country, society, family. The play 'Lok-Shastra Savitri' helped me to dig deep into the Savitris around me. Theatre of Relevance helped me to connect to my roots and nature."

- Ashwini Nandedkar, Actress, Member, Theater of Relevance


"We have a huge challenge in front of us,

but we are dedicated. Over 30 plays have been penned down and staged by various teams of Theatre of Relevance more than 16,000 times all over the country as well as abroad in the last 36 years. I am proud of my team."

- Manjul Bharadwaj,

Actor, Director, Writer, and Founder, Theatre of Relevance.

Philosophy of decoding audience response on current issues.


- SMITH KAWALE Smita Kawale

LOKMAT NEWS NETWORK, NASHIK


A group of young theatre enthusiasts with a different taker on theatre they call 'Theatre of Relevance', having a perspective based on humanity, and following the philosophy of decoding audience response, is currently in the city for its play 'Rajgati'. This play will be staged at Parshuram Saikhedkar Auditorium on Saturday, January 13.

In a free-wheeling chat with Lokmat Times, group member and actress Sayali Pawaskar says, "Theatre of Relevance is a theatre theory or a philosophy. It is romance with truth. It was conceptualised on Aug 12, 1992 by theatre activist Manjul Bharadwaj. He decided that he would only present drama which would carve a human out of a person. This value based drama is being studied all over the world."

"My audience is my inspiration and I idolise my audience. We are focussed not on populism, but on awakening the people. We are connecting with people and asking them to focus on liberty," says Manjul Bharadwaj. Taking this point further, Sayali says, "Today, when the society is least interested in taking a stand on any issue that is unacceptable, this group brings the issue to the fore and presents it in such a way through its plays with the the participation of students, activists, and teachers, apart from socially conscious actors, that the audience is compelled to think about the issue. We have broken the fourth wall of theatre that exists between the audience and the actors, but is not visible."


Actress Komal Khamkar laborates further, saying, "Once a this wall was broken, we entered the lives of the audience, started understanding their issues and began staging plays on their issues. In this process, we encountered many questions, which we tried to solve through our plays." Komal, who has also performed in various popular television serials, found that medium far removed from reality and when she met Ashwini Nandedkar, a member of Theatre of Relevance, there was no looking back, she reveals. It has been around ten years since Sayali and Komal have been with the Theatre of Relevance and "It has changed our lives inside out," they echo. Ashwini says, "When I began my journey with Theatre of Relevance, I did not have my own identity in the outsides, world. My first play 'Chhed Chhad Kyun' was focussed against eve-teasing. I experienced a feeling of pride then in the fact that I am a female and I am strong. From there I understood the importance of theatre in bringing about social transformation."

"Theatre of Relevance is a movement revolving around values and social issues that somehow seem to be fading away to a large extent from our society. I have a belief that if human values are to be awakened, an art form is the most effective way to make it happen. And theatre is exactly the kind of art form which can create miracles."