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Sunday, January 4, 2026

दैनिक भास्कर - 5 जनवरी 2026 - जागरूकता • रंगमंच के जरिए प्रकृति-मानव संबंधों पर कलात्मक प्रस्तुति

दैनिक भास्कर - 5 जनवरी 2026

जागरूकता • रंगमंच के जरिए प्रकृति-मानव संबंधों पर कलात्मक प्रस्तुति

नाटकों से जला रहे अलख, देश-विदेश में हजारों लोगों को कर चुके हैं प्रेरित



दुष्यंत मिश्र | मुंबई

रंकर्मी, नाटककार और निर्देशक मंजुल भारद्वाज रंगमंच को केवल मनोरंजन के लिए इस्तेमाल करने में विश्वास नहीं रखते, बल्कि उन्होंने इसे सामाजिक, पर्यावरणीय और मानवीय सरोकारों से जोड़ दिया है। यही वजह है कि उनका चर्चित नाटक 'द... अदर वर्ल्ड' पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति-मानव संबंधों पर एक ऐसी सशक्त कलात्मक रचना बन गया है जो पर्यावरण, इकोलॉजी और मानवता के साझा भविष्य को जनमानस से लेकर सत्ता के गलियारों तक पहुंचाता है। इस नाटक का मंचन भारत और यूरोप में हो चुका है। जिसे हजारों लोग देख चुके हैं। भारद्वाज ने बताया कि यूरोप में हुए मंचनों को पांच हजार से ज्यादा बच्चों, युवाओं और प्रौढ़ों ने देखा है। यह इस बात का प्रमाण था कि पर्यावरण और मानवीय सरोकार किसी एक देश या संस्कृति तक सीमित नहीं, बल्कि सार्वभौमिक हैं। महाराष्ट्र में मुंबई, पुणे, ठाणे, नाशिक, पनवेल, बीड़, माजलगांव, उदगीर और जलगांव जैसे शहरों में नाटक का मंचन हो चुका है। भारद्वाज ने कहा कि नाटक देखने के बाद लोगों की जो प्रतिक्रिया मिल रही है वह अद्वितीय है। अच्छी बात यह है कि लोग पैसे खर्च कर टिकट लेकर नाटक देखते हैं और उन्हें सरकार या किसी और संस्था के दान का मोहताज नहीं होना पड़ता।

तपोवन में पेड़ों की कटाई रोकी भारद्वाज ने कहा कि नाटक से उपजी चेतना का प्रत्यक्ष उदाहरण हाल ही में नाशिक में देखने को मिला। जहां कुंभ मेले के लिए तपोवन क्षेत्र में प्रस्तावित वृक्ष कटाई के निर्णय के विरुद्ध जनआंदोलन खड़ा हुआ। इस आंदोलन की अग्रिम पंक्ति में वे दर्शक थे, जिन्होंने 'द... अदर वर्ल्ड को देखा और आत्मसात किया था। परिणामस्वरूप, प्रशासन और महाराष्ट्र सरकार को संबंधित टेंडर रद्द करना पड़ा।



पांच साल पहले हुई शुरुआत : 40 वर्षों से रंगमंच से जुड़े

भारद्वाज ने कहा कि पांच साल पहले 'पर्यावरण' नाम के नाटक के साथ इसकी शुरुआत हुई। इसके बाद कोरोना महामारी आ गई। फिर हमने रिसर्च कर यह नाटक तैयार किया। उन्होंने कहा कि जब कला समाज और प्रकृति के पक्ष में हस्तक्षेप करती है, तब वह केवल मंच तक सीमित नहीं रहती, बल्कि एक आंदोलन का रूप ले लेती है। हमारी कोशिश यही है कि लोग इतने जागरूक हों कि पर्यावरण संरक्षण एक आंदोलन बन जाए। 'द... अदर वर्ल्ड प्रकृति और इकोलॉजी (पारिस्थितिकी) को सहेजने का ऐसा रचनात्मक अभियान है, जो दर्शकों को भीतर तक झकझोरता है और उन्हें सोचने, समझने व हस्तक्षेप करने के लिए प्रेरित करता है। भारद्वाज ने कहा कि हमारा नाट्यदर्शन है थियेटर ऑफ रेलेवंस जो रंगकर्म को सामाजिक सरोकार से जोड़ता है।

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